हरियाणा सरकारी कर्मचारियों की बड़ी जीत: डिस्टेंस एजुकेशन के लिए 3 साल की अनिवार्य सेवा शर्त अब खत्म!
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के हित में एक ऐसा फैसला सुनाया है जो उनके करियर के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अदालत ने हरियाणा सरकार के उस पुराने नियम को रद्द कर दिया है जिसके तहत डिस्टेंस एजुकेशन से पढ़ाई करने के लिए 3 साल की नियमित सेवा पूरी करना अनिवार्य था।
फैसले का मुख्य आधार: शिक्षा एक मौलिक अधिकार
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि एक 'आदर्श नियोक्ता' के रूप में राज्य सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अपने कर्मचारियों की शैक्षणिक उन्नति में सहयोग करे, न कि उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी करे। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन पीरियड (Probation Period) के दौरान भी कर्मचारी का पढ़ाई का हक बना रहता है।
विस्तार से जानें: क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के माध्यम से नियुक्त एक कर्मचारी (नवीन कुमार) से शुरू हुआ था। नवीन ने अपनी ड्यूटी जॉइन करने के कुछ समय बाद ही डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए बीए (BA) करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन विभाग ने 2 जुलाई 2024 को यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया कि उन्होंने अभी 3 साल की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की है। कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को पूरी तरह से गलत ठहराया।
इन कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा
- नवनियुक्त कर्मचारी जो नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।
- ग्रुप-सी (Group-C) और ग्रुप-डी (Group-D) के वे हजारों कर्मचारी जिन्हें प्रमोशन के लिए अतिरिक्त डिग्री की जरूरत है।
- प्रोबेशन पीरियड पर चल रहे कर्मचारी जो पहले अनुमति के लिए 3 साल का इंतज़ार करते थे।
पढ़ाई के लिए कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें
राहत देने के साथ-साथ कोर्ट ने प्रशासन की सुचारू व्यवस्था के लिए कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं:
- कोई स्टडी लीव नहीं: कर्मचारी इस पढ़ाई के लिए कोई विशेष अध्ययन अवकाश नहीं ले सकेगा।
- काम की गुणवत्ता: कर्मचारी की पढ़ाई के कारण सरकारी काम और उसकी गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए।
- परीक्षा अवकाश: कर्मचारी को केवल परीक्षा के दिनों के लिए ही छुट्टी दी जाएगी।

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